महाकाल
नगरी के नाम से विख्यात उज्जैन नगर प्रतिदिन श्रीमहाकालेश्वर भगवान् को याद करता
है और अपने हर कष्ट को दूर करने के लिए उन्हीं से प्रार्थना करता है। ऐसे भूतभावन
महादेव के चरणों में अर्पित हैं कुछ दोहे।
महादेव
के द्वार पर,
काल थका हरबार।
महाकाल प्रतिपाल की, लीला अपरम्पार।।
सुबह नहाएँ भस्म से, चढ़े दोपहर भांग।
कब जाने हैं भक्तगण, शिव को
सांगोपांग।।
डम-डम-डम डमरू बजे, बहे गंग की धार।
मोहित शिव के रूप पर, यह सारा संसार।।
चिता-भस्म तन पर मलें, महाकाल नित प्रात।
और नहाएँ दूध से, गहें बेल के पात।।
नीलकंठ गल माल बन, हर्षित चपल भुजंग।
शशि सोहे है
भाल पर, बहे जटा से गंग।।
बिल्व-पत्र अर्पित करूँ, और करूँ नित ध्यान।
महाकाल करना
कृपा, हो जीवन आसान।।
देवों के भी
देव शिव, सीधा सरल स्वभाव।
रखें सभी
से एक-सम, महादेव
बरताव।।
अपना घर अपनी डगर, अपना नगर सुहाय।
महाकाल का छोड़ दर, ‘भगत’ कहाँ अब जाय।।
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अशोक रक्ताले ‘फणीन्द्र’
