ग़ज़लें अशोक की गजलें : हमने यहीं पर ये चलन देखा: हमने यहीं पर ये चलन देखा हर गैर में इक अपनापन देखा देखी नुमाइश जिस्म की फिरभी जूतों से नर का आकलन देखा ह...http://chhandgeet.blogspot.com/