कभी दिखाता सत्य अहिंसा, कभी घाव भी देता है।
कभी बाँधता प्रेम पाश में, कभी प्राण हर लेता है।।
रात दिवस जो चलती रहती, उन साँसों का माली है।
कुदरत के हैं खेल निराले, समय बड़ा बलशाली है।।
कभी बाँधता प्रेम पाश में, कभी प्राण हर लेता है।।
रात दिवस जो चलती रहती, उन साँसों का माली है।
कुदरत के हैं खेल निराले, समय बड़ा बलशाली है।।
कभी बैर बन रहता दिल में, कभी मित्र सा होता है।
याद बने तो फिर आँखों में , सदा चित्र सा होता है।
यही रंक कर देता मन को , यही प्रीति भर देता है।
बदल गया तो मिली हार को, समय जीत कर देता है।।
समय सूर्य बनकर जीवन को, अपनी आभा देता है।
आस रहे तो इस जीवन में, पुष्प नए खिल जाते हैं।
अँधियारे के छटते कितने, रास्ते हम तुम पाते हैं।।
आस दीप जिस दिल में रोशन, वह जीवन मुस्काएगा।
बुझा दीप यदि मानव समझो, तम यह फिर घिर आयेगा।
दीप शिखा नित उन्नत रखना , ऊँची हर सच्चाई हो।
पूछो जिसका दीप बुझा हो, रात अँधेरी पायी हो।।
