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प्रेम ऋतु मधुमास

प्रेम ऋतु मधुमास शीतकाल की ठिठुरन को दूर करने जब प्रकृति मौसम में गुनगुनापन घोल देती है। तब प्रत्येक पंछी अपने पर फैलाना…

कह-मुकरी

कह-मुकरी        कह-मुकरी’ चार पंक्तियों की एक पद्य रचना है। यह जब 16-16 मात्राओं पर होती है, तब यह   सम-मात्रिक छंद ‘पाद…

मुश्किल में आवाम

मुश्किल में आवाम   ख़त्म     नहीं   होते   कभी, इस जीवन के काम। और     मनुज    पाता नहीं, यहाँ   कभी आराम।।   सोने …

वही सजन का गाँव

जिसका  आँचल शीश पर, रखता हर पल छाँव। वो  ही  मिट्टी  फूल   है, वही  सजन  का   गाँव।।   सभी   ओर  जब  झूठ  का, होता   ह…

पगडंडी वीरान है

आम   नीम   मधुमालती , गुलमोहर      के   फूल। करते      गर्म      बयार     का , अहं    पलों  में  धूल।।   पगडंडी  …

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