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घन गरजे अंधियारी छाई,
बिजली अम्बर पर इठलाई
बूँदें टपकी टप-टप भाई
रिमझिम रिमझिम बारिश आई
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पत्ते खड़के भीगे लरजे
चिड़िया सहमी बादल गरजे,
कुत्ते दुबके गैया भागी
इक नन्हीं सी गुड़िया जागी
सुनकर उसकी तेज रुलाई
रिमझिम रिमझिम बारिश आई
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सड़कों से बह निकला पानी
राहगीरों ने छतरी तानी,
छप-छप करते कदम बढ़ाते
ठोकर खाते गिरते जाते
बूँदें ले आयीं कठिनाई
रिमझिम-रिमझिम बारिश आई
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बनकर वैद्य टटोले नाड़ी
गड्ढ़े में जा
बैठी गाड़ी
उफनाया है
सूखा नाला
फूट गया जो बाँधा पाला
हर छोटी नाली उफनाई
रिमझिम-रिमझिम बारिश आई।
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अशोक रक्ताले ‘फणीन्द्र’
उज्जैन
९४२४८४३९४२
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